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Dua e Qunoot in Hindi | दुआ ए क़ुनूत हिंदी में (अरबी, अनुवाद, तरीक़ा, PDF)

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Dua e Qunoot in Hindi – दुआ ए क़ुनूत हिंदी में (अरबी, अनुवाद, तरीक़ा, PDF)

Dua e Qunoot विट्र नमाज़ में पढ़ी जाने वाली एक विशेष प्रार्थना है। यह अल्लाह से मार्गदर्शन (हिदायत), सुरक्षा (आफ़ियत), क्षमा (मग़फ़िरत) और बरकत मांगने की दुआ है।

यह दुआ क़ुरान की आयत नहीं है, बल्कि नबी मुहम्मद ﷺ ने अपने पोते हसन इब्न अली (रज़ि.) को सिखाई थी। यह हदीस में सुनन अबू दाऊद, तिर्मिज़ी और नसाई में मौजूद है।

इस गाइड में क्या है: अरबी, हिंदी उच्चारण, हिंदी अनुवाद, शब्द-दर-शब्द मतलब, हनफ़ी और शाफ़ई तरीक़ा, विट्र में सही विधि, विकल्प, फ़ज़ीलत, PDF डाउनलोड और सभी सवालों के जवाब।

What is Dua e Qunoot? – दुआ ए क़ुनूत क्या है और क्यों पढ़ी जाती है?

Dua e Qunoot एक ऐसी प्रार्थना है जो विट्र नमाज़ की तीसरी रकअत में खड़े होकर पढ़ी जाती है। इसमें अल्लाह से मार्गदर्शन, सुरक्षा, क्षमा और बरकत मांगी जाती है।

शब्द “क़ुनूत” का अर्थ है – इख़लास, नम्रता और अल्लाह के सामने खड़े होकर आज्ञाकारिता दिखाना। यह दुआ क़ुरान नहीं है, बल्कि हदीस से साबित है।

नबी ﷺ ने फ़रमाया: “वित्र की नमाज़ में क़ुनूत पढ़ो, क्योंकि यह अल्लाह की रज़ा पाने का ज़रिया है।” (अबू दाऊद)

महत्वपूर्ण: दुआ ए क़ुनूत सिर्फ विट्र नमाज़ में पढ़ी जाती है। इसे हर रकअत या हर नमाज़ में नहीं पढ़ा जाता। यह विट्र की आखिरी (तीसरी) रकअत की खास दुआ है।

Dua e Qunoot Arabic, Hindi Pronunciation & Translation – अरबी, हिंदी उच्चारण और अनुवाद

यहाँ दुआ ए क़ुनूत के दो प्रचलित संस्करण दिए गए हैं। दोनों सही और मान्य हैं।

Short Dua – Allahumma Ihdini (छोटी दुआ – हसन इब्न अली रज़ि. से)

यह सबसे प्रचलित संस्करण है जो सुनन अबू दाऊद, तिर्मिज़ी और नसाई में आया है।

अरबी:

اللَّهُمَّ اهْدِنِي فِيمَنْ هَدَيْتَ، وَعَافِنِي فِيمَنْ عَافَيْتَ، وَتَوَلَّنِي فِيمَنْ تَوَلَّيْتَ، وَبَارِكْ لِي فِيمَا أَعْطَيْتَ، وَقِنِي شَرَّ مَا قَضَيْتَ، فَإِنَّكَ تَقْضِي وَلَا يُقْضَى عَلَيْكَ، وَإِنَّهُ لَا يَذِلُّ مَنْ وَالَيْتَ، وَلَا يَعِزُّ مَنْ عَادَيْتَ، تَبَارَكْتَ رَبَّنَا وَتَعَالَيْتَ

हिंदी उच्चारण (रोमन हिंदी):

अल्लाहुम्मा इह्दिनी फ़ीमन हदैत, व आफ़िनी फ़ीमन आफ़ैत, व तवल्लनी फ़ीमन तवल्लैत, व बारिक ली फ़ीमा आतैत, व क़िनी शर्र मा क़दैत, फ़ इन्नका तक़दी व ला युक़दा अलैक, व इन्नहु ला यज़िल्लु मन वालैत, व ला यअज़्ज़ु मन आदैत, तबारकत रब्बना व तआलैत।

हिंदी अनुवाद:

“ऐ अल्लाह! मुझे उन लोगों में शामिल कर जिन्हें तूने हिदायत दी, मुझे उन लोगों में शामिल कर जिन्हें तूने आफ़ियत (सुरक्षा) दी, मुझे उन लोगों में शामिल कर जिनकी तूने कफ़ालत (देखभाल) की, मुझे बरकत दे जो तूने मुझे दिया, और मुझे उस बुराई से बचा जो तूने तक़दीर की। बेशक तू ही फ़ैसला करता है और तेरे ख़िलाफ़ कोई फ़ैसला नहीं कर सकता। बेशक वह ज़लील नहीं होता जिससे तू दोस्ती करे, और वह इज़्ज़त नहीं पाता जिससे तू दुश्मनी करे। ऐ हमारे रब! तू बड़ी बरकत वाला और बुलंद है।”

Longer Dua – Allahumma Inna Nasta’inuka (बड़ी दुआ – हनफ़ी मसलक)

यह संस्करण पाकिस्तान और भारत में हनफ़ी मसलक में अधिक प्रचलित है। यह उमर इब्न खत्ताब (रज़ि.) से मरवी है।

अरबी:

اَللَّهُمَّ إِنَّا نَسْتَعِيْنُکَ وَنَسْتَغْفِرُکَ، وَنُؤْمِنُ بِکَ وَنَتَوَکَّلُ عَلَيْکَ، وَنُثْنِيْ عَلَيْکَ الْخَيْرَ، وَنَشْکُرُکَ وَلَا نَکْفُرُکَ، وَنَخْلَعُ وَنَتْرُکُ مَنْ يَّفْجُرُکَ، اَللَّهُمَّ إِيَّاکَ نَعْبُدُ وَلَکَ نُصَلِّيْ وَنَسْجُدُ وَإِلَيْکَ نَسْعٰی وَنَحْفِدُ، وَنَرْجُوْا رَحْمَتَکَ وَنَخْشٰی عَذَابَکَ، إِنَّ عَذَابَکَ بِالْکُفَّارِ مُلْحِقٌ

हिंदी उच्चारण (रोमन हिंदी):

अल्लाहुम्मा इन्ना नस्तईनुका व नस्तग़फिरुका, व नु’मिनु बिका व नतवक्कलु अलैका, व नुस्नी अलैकल ख़ैर, व नश्कुरुका व ला नक्फुरुका, व नख़्ल’अु व नतरुकु मै यफ़्जुरुक। अल्लाहुम्मा इय्याका न’बुदु व लका नुसल्ली व नस्जुदु, व इलैका नस’आ व नह्फ़िदु, व नर्जू रहमतका व नख़शा अज़ाबका, इन्ना अज़ाबका बिल कुफ़्फ़ारि मुल्हिक़।

हिंदी अनुवाद:

“ऐ अल्लाह! हम तुझ ही से मदद माँगते हैं और तुझ ही से क्षमा माँगते हैं, हम तुझ पर ईमान रखते हैं और तुझ ही पर भरोसा करते हैं, हम तेरी अच्छाई के साथ तारीफ़ करते हैं, हम तेरा शुक्र करते हैं और तेरी नाशुक्री नहीं करते, और जो तेरी नाफ़रमानी करे हम उससे दूरी बनाते हैं। ऐ अल्लाह! हम तेरी ही इबादत करते हैं, तेरे लिए नमाज़ पढ़ते हैं और सजदा करते हैं, तेरी ही तरफ़ दौड़ते और कोशिश करते हैं, हम तेरी रहमत की उम्मीद रखते हैं और तेरे अज़ाब से डरते हैं, बेशक तेरा अज़ाब काफ़िरों को ज़रूर पहुँचने वाला है।”
दोनों में से कौन सी दुआ सही है? दोनों ही सही और मान्य हैं। आप किसी भी संस्करण को पढ़ सकते हैं। कुछ उलेमा दोनों को मिलाकर भी पढ़ते हैं।

Word-by-Word Hindi Translation – शब्द-दर-शब्द हिंदी अनुवाद (हर शब्द का मतलब)

नीचे दी गई तालिका में दुआ के हर अरबी वाक्यांश का हिंदी में अलग-अलग मतलब दिया गया है। इससे दुआ को समझकर पढ़ने में आसानी होगी।

अरबीहिंदी उच्चारणहिंदी अनुवाद
اللَّهُمَّ اهْدِنِي فِيمَنْ هَدَيْتَअल्लाहुम्मा इह्दिनी फ़ीमन हदैतऐ अल्लाह! मुझे हिदायत दे उन लोगों में जिन्हें तूने हिदायत दी
وَعَافِنِي فِيمَنْ عَافَيْتَव आफ़िनी फ़ीमन आफ़ैतऔर मुझे आफ़ियत (सुरक्षा) दे उन लोगों में जिन्हें तूने आफ़ियत दी
وَتَوَلَّنِي فِيمَنْ تَوَلَّيْتَव तवल्लनी फ़ीमन तवल्लैतऔर मुझे अपनी कफ़ालत (देखभाल) में ले
وَبَارِكْ لِي فِيمَا أَعْطَيْتَव बारिक ली फ़ीमा आतैतऔर मुझे बरकत दे जो तूने मुझे दिया
وَقِنِي شَرَّ مَا قَضَيْتَव क़िनी शर्र मा क़दैतऔर मुझे उस बुराई से बचा जो तूने तक़दीर की
فَإِنَّكَ تَقْضِي وَلَا يُقْضَى عَلَيْكَफ़ इन्नका तक़दी व ला युक़दा अलैकबेशक तू फ़ैसला करता है और तुझ पर कोई फ़ैसला नहीं कर सकता
تَبَارَكْتَ رَبَّنَا وَتَعَالَيْتَतबारकत रब्बना व तआलैतऐ हमारे रब! तू बरकत वाला और बुलंद है

Correct Method in Witr Prayer – विट्र नमाज़ में पढ़ने का सही तरीक़ा

यहाँ हनफ़ी मसलक के अनुसार विट्र में दुआ ए क़ुनूत पढ़ने का तरीक़ा दिया गया है:

  1. तीसरी रकअत की क़िरात पूरी करें – सूरह फ़ातिहा और कोई और सूरह पढ़ने के बाद।
  2. “अल्लाहु अकबर” कहकर हाथ कानों तक उठाएँ – जैसे नमाज़ शुरू करते समय।
  3. हाथों को नाफ़ के नीचे बाँध लें – सामान्य क़ियाम की तरह।
  4. दुआ ए क़ुनूत पढ़ें – ऊपर दिए गए किसी भी संस्करण से। अगर अरबी याद न हो तो अपनी भाषा में भी पढ़ सकते हैं (जब तक याद न हो जाए)।
  5. “अल्लाहु अकबर” कहकर रुकू में जाएँ – और बाकी नमाज़ पूरी करें।

Hanafi vs Shafi’i Difference – हनफ़ी और शाफ़ई मसलक में अंतर

दोनों मसलक में यही दुआ पढ़ी जाती है, लेकिन अंतर समय और स्थान का है:

मसलककब पढ़ते हैं?किस स्थिति में?
हनफ़ीहर विट्र नमाज़ में, तीसरी रकअत मेंरुकू से पहले
शाफ़ईहर फज्र नमाज़ में, दूसरी रकअत मेंरुकू से बाद
मालिकीहर फज्र नमाज़ मेंरुकू से पहले
हंबलीसिर्फ मुसीबत के समय (क़ुनूत-ए-नाज़िला)रुकू के बाद

शिया मसलक में क़ुनूत हर नमाज़ की दूसरी रकअत में पढ़ा जाता है। शिया मसलक में क़ुनूत का तरीक़ा जानें

What to Read if You Don’t Remember? – दुआ याद न हो तो क्या पढ़ें? (विकल्प)

अगर आपको दुआ ए क़ुनूत याद नहीं है, तो इसके बजाय यह छोटी दुआ पढ़ सकते हैं:

अरबी:

رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ

हिंदी उच्चारण:

रब्बना आतिना फ़िद-दुन्या हसनतन व फ़िल-आख़िरति हसनतन व क़िना अज़ाबन-नार।

हिंदी अनुवाद:

“ऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भी भलाई दे और आख़िरत में भी भलाई दे और हमें जहन्नम के अज़ाब से बचा।”

इसके अलावा “अल्लाहुम्मग़फिर्ली” (ऐ अल्लाह! मुझे माफ़ कर) तीन बार भी कह सकते हैं। दुआ ए क़ुनूत की जगह पढ़ने के और विकल्प

Benefits & Virtues – फ़ायदे और फ़ज़ीलत

इस दुआ को पढ़ने से अल्लाह पर भरोसा बढ़ता है, दिल में नम्रता आती है, और हिदायत, माफ़ी व हिफ़ाज़त मिलती है।

दुआ ए क़ुनूत के सभी 7 आध्यात्मिक फ़ायदे विस्तार से पढ़ें — जानें कि यह दुआ आपकी ज़िंदगी कैसे बदल सकती है।

5 Easy Ways to Memorize – याद करने के 5 आसान तरीक़े

  • छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटें – पूरी दुआ को 5-6 छोटे वाक्यांशों में तोड़ लें।
  • मतलब समझें – हर वाक्यांश का अर्थ जानने से याद रखना आसान हो जाता है।
  • सुनें और दोहराएँ – ऑडियो सुनते हुए हर वाक्यांश को कई बार दोहराएँ।
  • लिखकर याद करें – हर चंक को हाथ से लिखें, इससे याददाश्त मजबूत होती है।
  • नमाज़ में प्रैक्टिस करें – जब थोड़ा याद हो जाए, तो विट्र में पढ़ना शुरू करें।

“अल्लाहुम्मा इह्दिनी” – शब्द-दर-शब्द मायने और याद करने का तरीक़ा

Frequently Asked Questions – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

What is Dua e Qunoot? – दुआ ए क़ुनूत क्या है? यह विट्र नमाज़ की तीसरी रकअत में पढ़ी जाने वाली दुआ है जिसमें अल्लाह से हिदायत, आफ़ियत, मग़फ़िरत और बरकत माँगी जाती है।
What is Dua e Qunoot in Hindi? – दुआ ए क़ुनूत हिंदी में क्या है?
अल्लाहुम्मा इह्दिनी फ़ीमन हदैत, व आफ़िनी फ़ीमन आफ़ैत, व तवल्लनी फ़ीमन तवल्लैत…

पूरा अनुवाद ऊपर दिया गया है।

When is Dua e Qunoot recited? – दुआ ए क़ुनूत कब पढ़ी जाती है? हनफ़ी मसलक में विट्र की तीसरी रकअत में क़ुरान पढ़ने के बाद, रुकू से पहले। शाफ़ई मसलक में फज्र की दूसरी रकअत में रुकू के बाद।
What to read if you don’t remember Dua e Qunoot? – दुआ ए क़ुनूत याद न हो तो क्या पढ़ें? “रब्बना आतिना फ़िद-दुन्या हसनतन व फ़िल-आख़िरति हसनतन व क़िना अज़ाबन-नार” पढ़ें।
Is Dua e Qunoot from the Quran? – क्या दुआ ए क़ुनूत क़ुरान से है? नहीं, यह क़ुरान की आयत नहीं है। यह हदीस में आई हुई दुआ है।
Can women recite Dua e Qunoot? – क्या महिलाएं दुआ ए क़ुनूत पढ़ सकती हैं? जी हाँ, महिलाएं भी पुरुषों की तरह ही यह दुआ पढ़ती हैं। तरीक़ा और शब्द दोनों एक समान हैं।
Is Dua e Qunoot recited in every rak’ah? – क्या दुआ ए क़ुनूत हर रकअत में पढ़नी चाहिए? नहीं, यह सिर्फ विट्र की तीसरी (आखिरी) रकअत में पढ़ी जाती है।
How to memorize Dua e Qunoot? – दुआ ए क़ुनूत कैसे याद करें? दुआ को 5-6 छोटे हिस्सों में बाँटें, हर हिस्से का मतलब समझें, और नमाज़ में प्रैक्टिस करें।
Is Dua e Qunoot obligatory (Fard)? – क्या दुआ ए क़ुनूत पढ़ना फ़र्ज़ है? हनफ़ी मसलक में यह वाजिब है (फ़र्ज़ के क़रीब)। शाफ़ई, मालिकी और हंबली मसलक में सुन्नत है।
What if I forget Dua e Qunoot? – दुआ ए क़ुनूत भूल जाएँ तो क्या करें? हनफ़ी मसलक में अगर रुकू से पहले याद आए तो खड़े होकर पढ़ें। अगर बाद में याद आए तो सजदा सहव करें।

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