
Dua e Qunoot विट्र नमाज़ में पढ़ी जाने वाली एक विशेष प्रार्थना है। यह अल्लाह से मार्गदर्शन (हिदायत), सुरक्षा (आफ़ियत), क्षमा (मग़फ़िरत) और बरकत मांगने की दुआ है।
यह दुआ क़ुरान की आयत नहीं है, बल्कि नबी मुहम्मद ﷺ ने अपने पोते हसन इब्न अली (रज़ि.) को सिखाई थी। यह हदीस में सुनन अबू दाऊद, तिर्मिज़ी और नसाई में मौजूद है।
- What is Dua e Qunoot? – दुआ ए क़ुनूत क्या है और क्यों पढ़ी जाती है?
- Dua e Qunoot Arabic, Hindi Pronunciation & Translation – अरबी, हिंदी उच्चारण और अनुवाद
- Word-by-Word Hindi Translation – शब्द-दर-शब्द हिंदी अनुवाद (हर शब्द का मतलब)
- Correct Method in Witr Prayer – विट्र नमाज़ में पढ़ने का सही तरीक़ा
- Hanafi vs Shafi’i Difference – हनफ़ी और शाफ़ई मसलक में अंतर
- What to Read if You Don’t Remember? – दुआ याद न हो तो क्या पढ़ें? (विकल्प)
- Benefits & Virtues – फ़ायदे और फ़ज़ीलत
- 5 Easy Ways to Memorize – याद करने के 5 आसान तरीक़े
- Frequently Asked Questions – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
- Download PDF – दुआ ए क़ुनूत हिंदी PDF डाउनलोड करें
What is Dua e Qunoot? – दुआ ए क़ुनूत क्या है और क्यों पढ़ी जाती है?
Dua e Qunoot एक ऐसी प्रार्थना है जो विट्र नमाज़ की तीसरी रकअत में खड़े होकर पढ़ी जाती है। इसमें अल्लाह से मार्गदर्शन, सुरक्षा, क्षमा और बरकत मांगी जाती है।
शब्द “क़ुनूत” का अर्थ है – इख़लास, नम्रता और अल्लाह के सामने खड़े होकर आज्ञाकारिता दिखाना। यह दुआ क़ुरान नहीं है, बल्कि हदीस से साबित है।
नबी ﷺ ने फ़रमाया: “वित्र की नमाज़ में क़ुनूत पढ़ो, क्योंकि यह अल्लाह की रज़ा पाने का ज़रिया है।” (अबू दाऊद)
Dua e Qunoot Arabic, Hindi Pronunciation & Translation – अरबी, हिंदी उच्चारण और अनुवाद
यहाँ दुआ ए क़ुनूत के दो प्रचलित संस्करण दिए गए हैं। दोनों सही और मान्य हैं।
Short Dua – Allahumma Ihdini (छोटी दुआ – हसन इब्न अली रज़ि. से)
यह सबसे प्रचलित संस्करण है जो सुनन अबू दाऊद, तिर्मिज़ी और नसाई में आया है।
अरबी:
हिंदी उच्चारण (रोमन हिंदी):
हिंदी अनुवाद:
Longer Dua – Allahumma Inna Nasta’inuka (बड़ी दुआ – हनफ़ी मसलक)
यह संस्करण पाकिस्तान और भारत में हनफ़ी मसलक में अधिक प्रचलित है। यह उमर इब्न खत्ताब (रज़ि.) से मरवी है।
अरबी:
हिंदी उच्चारण (रोमन हिंदी):
हिंदी अनुवाद:
Word-by-Word Hindi Translation – शब्द-दर-शब्द हिंदी अनुवाद (हर शब्द का मतलब)
नीचे दी गई तालिका में दुआ के हर अरबी वाक्यांश का हिंदी में अलग-अलग मतलब दिया गया है। इससे दुआ को समझकर पढ़ने में आसानी होगी।
| अरबी | हिंदी उच्चारण | हिंदी अनुवाद |
|---|---|---|
| اللَّهُمَّ اهْدِنِي فِيمَنْ هَدَيْتَ | अल्लाहुम्मा इह्दिनी फ़ीमन हदैत | ऐ अल्लाह! मुझे हिदायत दे उन लोगों में जिन्हें तूने हिदायत दी |
| وَعَافِنِي فِيمَنْ عَافَيْتَ | व आफ़िनी फ़ीमन आफ़ैत | और मुझे आफ़ियत (सुरक्षा) दे उन लोगों में जिन्हें तूने आफ़ियत दी |
| وَتَوَلَّنِي فِيمَنْ تَوَلَّيْتَ | व तवल्लनी फ़ीमन तवल्लैत | और मुझे अपनी कफ़ालत (देखभाल) में ले |
| وَبَارِكْ لِي فِيمَا أَعْطَيْتَ | व बारिक ली फ़ीमा आतैत | और मुझे बरकत दे जो तूने मुझे दिया |
| وَقِنِي شَرَّ مَا قَضَيْتَ | व क़िनी शर्र मा क़दैत | और मुझे उस बुराई से बचा जो तूने तक़दीर की |
| فَإِنَّكَ تَقْضِي وَلَا يُقْضَى عَلَيْكَ | फ़ इन्नका तक़दी व ला युक़दा अलैक | बेशक तू फ़ैसला करता है और तुझ पर कोई फ़ैसला नहीं कर सकता |
| تَبَارَكْتَ رَبَّنَا وَتَعَالَيْتَ | तबारकत रब्बना व तआलैत | ऐ हमारे रब! तू बरकत वाला और बुलंद है |
Correct Method in Witr Prayer – विट्र नमाज़ में पढ़ने का सही तरीक़ा
यहाँ हनफ़ी मसलक के अनुसार विट्र में दुआ ए क़ुनूत पढ़ने का तरीक़ा दिया गया है:
- तीसरी रकअत की क़िरात पूरी करें – सूरह फ़ातिहा और कोई और सूरह पढ़ने के बाद।
- “अल्लाहु अकबर” कहकर हाथ कानों तक उठाएँ – जैसे नमाज़ शुरू करते समय।
- हाथों को नाफ़ के नीचे बाँध लें – सामान्य क़ियाम की तरह।
- दुआ ए क़ुनूत पढ़ें – ऊपर दिए गए किसी भी संस्करण से। अगर अरबी याद न हो तो अपनी भाषा में भी पढ़ सकते हैं (जब तक याद न हो जाए)।
- “अल्लाहु अकबर” कहकर रुकू में जाएँ – और बाकी नमाज़ पूरी करें।
Hanafi vs Shafi’i Difference – हनफ़ी और शाफ़ई मसलक में अंतर
दोनों मसलक में यही दुआ पढ़ी जाती है, लेकिन अंतर समय और स्थान का है:
| मसलक | कब पढ़ते हैं? | किस स्थिति में? |
|---|---|---|
| हनफ़ी | हर विट्र नमाज़ में, तीसरी रकअत में | रुकू से पहले |
| शाफ़ई | हर फज्र नमाज़ में, दूसरी रकअत में | रुकू से बाद |
| मालिकी | हर फज्र नमाज़ में | रुकू से पहले |
| हंबली | सिर्फ मुसीबत के समय (क़ुनूत-ए-नाज़िला) | रुकू के बाद |
शिया मसलक में क़ुनूत हर नमाज़ की दूसरी रकअत में पढ़ा जाता है। शिया मसलक में क़ुनूत का तरीक़ा जानें।
What to Read if You Don’t Remember? – दुआ याद न हो तो क्या पढ़ें? (विकल्प)
अगर आपको दुआ ए क़ुनूत याद नहीं है, तो इसके बजाय यह छोटी दुआ पढ़ सकते हैं:
अरबी:
हिंदी उच्चारण:
हिंदी अनुवाद:
इसके अलावा “अल्लाहुम्मग़फिर्ली” (ऐ अल्लाह! मुझे माफ़ कर) तीन बार भी कह सकते हैं। दुआ ए क़ुनूत की जगह पढ़ने के और विकल्प।
Benefits & Virtues – फ़ायदे और फ़ज़ीलत
इस दुआ को पढ़ने से अल्लाह पर भरोसा बढ़ता है, दिल में नम्रता आती है, और हिदायत, माफ़ी व हिफ़ाज़त मिलती है।
दुआ ए क़ुनूत के सभी 7 आध्यात्मिक फ़ायदे विस्तार से पढ़ें — जानें कि यह दुआ आपकी ज़िंदगी कैसे बदल सकती है।
5 Easy Ways to Memorize – याद करने के 5 आसान तरीक़े
- छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटें – पूरी दुआ को 5-6 छोटे वाक्यांशों में तोड़ लें।
- मतलब समझें – हर वाक्यांश का अर्थ जानने से याद रखना आसान हो जाता है।
- सुनें और दोहराएँ – ऑडियो सुनते हुए हर वाक्यांश को कई बार दोहराएँ।
- लिखकर याद करें – हर चंक को हाथ से लिखें, इससे याददाश्त मजबूत होती है।
- नमाज़ में प्रैक्टिस करें – जब थोड़ा याद हो जाए, तो विट्र में पढ़ना शुरू करें।
“अल्लाहुम्मा इह्दिनी” – शब्द-दर-शब्द मायने और याद करने का तरीक़ा।
Frequently Asked Questions – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
पूरा अनुवाद ऊपर दिया गया है।
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